अभी तक आपने लड़के और लड़कियों की प्रेम कहानी में परिजनों के बाधा बनने की बात सुनी होगी। लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट में ऐसा अनोखा और अजीबोगरीब मामला पहुंचा है, जिसको जानकर आप हैरान हो जाएंगे। दो साल पहले तक नीट परीक्षा की तैयारी करने वाली वाराणसी की फरीदा अंसारी और छत्तीसगढ़ की प्रगति कुशवाहा के लिव इन रिलेशन में रहने के फैसले ने न सिर्फ उनके परिजनों को हैरान और परेशान कर दिया है। बल्कि अंतर धार्मिक होने के चलते दोनों लड़कियों के इस फैसले पर हाईकोर्ट के सरकारी वकील ने भी कड़ी आपत्ति जताई है। हालांकि हाईकोर्ट ने फौरी तौर पर दोनों की आशंका को देखते हुए बालिग होने के आधार पर सुरक्षा के निर्देश पुलिस अधिकारियों को दिए हैं।
बता दे कि वाराणसी की फरीदा अंसारी और छत्तीसगढ़ की प्रगति कुशवाहा ने हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर परिजनों से अपनी जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की है। दोनों ने अपनी याचिका में कहा है कि वह बालिग हैं और अपनी मर्जी से दोनों एक साथ रह रही हैं। लेकिन दोनों के परिजन उनकी निजी जिंदगी में बाधा बन रहें हैं, उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं, दोनों को अलग करने की कोशिश की जा रही है। जस्टिस गौतम चौधरी की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए फौरी तौर पर बालिग होने के आधार पर वाराणसी पुलिस कमिश्नर को दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पूरे मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद फैसले को भी सुरक्षित रख लिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचियों की तरफ से पेश अधिवक्ता महेंद्र यादव ने बताया कि करीब 2 साल पहले फरीदा अंसारी वाराणसी से छत्तीसगढ़ में नीट परीक्षा की तैयारी करने के लिए गई थी। जहां पर प्रगति कुशवाहा के घर में किराए पर कमरा लेकर वह रहती थी, इसी दौरान दोनों के बीच बेहद घनिष्ठ संबंध बन गए और यह घनिष्ठ संबंध धीरे-धीरे आपसी प्रेम में बदल गया। इसके बाद दोनों ने एक साथ रहने का फैसला किया। मौजूदा समय में वाराणसी में दोनों एक साथ रहकर जॉब कर रहीं हैं। लेकिन दोनों के परिजन उन्हें लगातार धमकियां दे रहे हैं, जिसमें सुरक्षा की मांग को लेकर फरीदा अंसारी और प्रगति कुशवाहा की तरफ से इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। हाईकोर्ट के निर्देश पर सोमवार को फरीदा अंसारी और प्रगति कुशवाहा कोर्ट के सामने पेश हुई। इस दौरान दोनों की तरफ से कहा गया कि वह बालिग हैं और अपनी मर्जी से लिव इन रिलेशन में रह रही है। याचियों ने हाईकोर्ट के समक्ष कहा कि उनकी जान को परिजनों से खतरा है, लगातार उन्हें अलग रहने के लिए धमकाया जा रहा है। याचिका में दोनों याचियों ने हाईकोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता की मांग के साथ सुरक्षा की गुहार लगाई है। हाईकोर्ट में पेश सरकारी वकील ने याचिका का विरोध किया। दोनों के अंतर धार्मिक होने के आधार पर एक साथ लिव इन में रहने पर सरकारी वकील ने कड़ी आपत्ति जताई। फिलहाल जस्टिस गौतम चौधरी की बेंच ने मामले की सुनवाई को पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है। आदेश आने तक हाईकोर्ट ने दोनों लड़कियों की सुरक्षा को लेकर संबंधित अधिकारी को जरूरी दिशा निर्देश दिए हैं।
